कर्नाटक कैबिनेट पोर्टफोलियो विवाद रामलिंग रेड्डी का इस्तीफा डीके शिवकुमार को पहला बड़ा झटका!

On: June 5, 2026 10:35 AM
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कर्नाटक कैबिनेट पोर्टफोलियो विवाद

कर्नाटक कैबिनेट पोर्टफोलियो विवाद कर्नाटक राजनीति में नया सियासी तूफान आ गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण के महज दो दिन बाद ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मंत्री रामलिंग रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया है। बेंगलुरु विकास मंत्रालय न मिलने की नाराजगी ने कांग्रेस पार्टी के अंदर गहरा संकट पैदा कर दिया है। यह घटना न सिर्फ शिवकुमार सरकार की स्थिरता पर सवाल उठा रही है, बल्कि कर्नाटक कांग्रेस की आंतरिक कलह को भी उजागर कर रही है।

कर्नाटक कैबिनेट पोर्टफोलियो विवाद
कर्नाटक कैबिनेट पोर्टफोलियो विवाद कर्नाटक कैबिनेट में विभागों के बंटवारे को लेकर विवाद, जानें पूरा मामला

रामलिंग रेड्डी का इस्तीफा: क्या है पूरा मामला?

3 जून 2026 को डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद यह बदलाव हुआ। शपथ ग्रहण के बाद विभागों का बंटवारा किया गया, लेकिन इसमें रामलिंग रेड्डी को उनकी अपेक्षा के अनुसार महत्वपूर्ण विभाग नहीं मिला। आठ बार के विधायक और अनुभवी नेता रामलिंग रेड्डी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वे बेंगलुरु विकास मंत्रालय के अलावा कोई अन्य विभाग स्वीकार नहीं करेंगे।

सरकार ने उनकी इस मांग को नजरअंदाज करते हुए उन्हें वृहद और मध्यम सिंचाई विभाग सौंप दिया, जिससे वे बेहद नाराज हो गए। शुक्रवार सुबह रामलिंग रेड्डी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना इस्तीफा घोषित किया।

  • रामलिंग रेड्डी ने कहा, “मैं अभी भी कांग्रेस पार्टी में हूं। मैंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है।
  • पिछले 53 सालों से मैं कांग्रेस में हूं। मैंने कई मुख्यमंत्रियों की कैबिनेट में काम किया है
  • लेकिन कभी मंत्री पद नहीं मांगा।” उन्होंने 2023 के वादे की भी याद दिलाई
  • जिसमें कैबिनेट फेरबदल पर उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग देने का आश्वासन दिया गया था।

डीके शिवकुमार सरकार पर पहला संकट

डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनते ही यह पहला बड़ा झटका है। गुरुवार रात को विभाग बंटवारे की बैठक में रामलिंग रेड्डी बीच में ही बाहर चले गए थे। अब उनकी नाराजगी ने पूरे कैबिनेट में हलचल मचा दी है। कर्नाटक कांग्रेस के अंदर पहले से ही गुटबाजी की खबरें थीं, और यह घटना उसको और बढ़ावा दे रही है।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने खुद वित्त और कार्मिक विभाग अपने पास रखे हैं। अन्य प्रमुख विभागों का बंटवारा इस प्रकार हुआ:

  • उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर: राजस्व, युवा सशक्तीकरण और खेल विभाग
  • प्रियंक खरगे: गृह, सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी
  • यतींद्र सिद्धारमैया (सिद्धारमैया के बेटे): शहरी विकास विभाग
  • कृष्णा बायरे गौड़ा: बेंगलुरु शहरी विकास (बीबीएमपी के तहत)

रामलिंग रेड्डी को बेंगलुरु से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग न मिलना उनकी सीनियरिटी और लोकप्रियता को देखते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

कर्नाटक कैबिनेट पोर्टफोलियो विवाद रामलिंग रेड्डी कौन हैं?

  • रामलिंग रेड्डी कर्नाटक कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं। वे कई बार मंत्री रह चुके हैं
  • और पूर्व मुख्यमंत्रियों एम. वीरप्पा मोइली व एस.एम. कृष्णा के साथ काम कर चुके हैं।
  • बेंगलुरु जैसे महानगर के विकास से जुड़े मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
  • उनकी नाराजगी न सिर्फ व्यक्तिगत है, बल्कि पार्टी के भीतर सीनियर नेताओं की उपेक्षा का प्रतीक भी बन गई है।

क्या होगा आगे? संभावनाएं!

इस इस्तीफे के बाद कर्नाटक सरकार के अंदर गहन चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई नेता रामलिंग रेड्डी को मनाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। अगर यह विवाद नहीं सुलझा तो कांग्रेस की छवि पर असर पड़ सकता है, खासकर जब विपक्ष भाजपा पहले से ही हमलावर मुद्रा में है।

  • राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि डीके शिवकुमार को जल्द ही इस गतिरोध को सुलझाना होगा
  • वरना सरकार की शुरुआत ही अस्थिरता के साथ होगी। बेंगलुरु विकास विभाग
  • जैसे महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो पर विवाद भविष्य में और बड़े बदलाव का कारण बन सकता है।

कर्नाटक राजनीति का भविष्य

यह घटना दिखाती है कि सत्ता के बंटवारे में गुटबाजी कितनी गहरी हो सकती है। सिद्धारमैया से डीके शिवकुमार तक का सफर आसान नहीं रहा, और अब कैबिनेट के अंदर यह पहला विद्रोह सामने आया है। कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस की एकता बनाए रखना शिवकुमार के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रही है।

रामलिंग रेड्डी का इस्तीफा सिर्फ एक मंत्री की नाराजगी नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी की आंतरिक राजनीति का आईना है। अब देखना यह है कि डीके शिवकुमार इस संकट को कैसे संभालते हैं। क्या रामलिंग रेड्डी को मनाया जाएगा या फिर बड़ा फेरबदल होगा? कर्नाटक की सियासत इन दिनों काफी गर्म है।

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