ममता बनर्जी गुड न्यूज पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों काफी गर्म है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में सत्ता गंवाने के बाद बड़े पैमाने पर बगावत देखने को मिल रही है। लेकिन ममता बनर्जी के लिए यह गुड न्यूज साबित हो रहा है। 58 बागी विधायकों के गुट में महज 24 घंटे के अंदर ही आपसी कलह शुरू हो गई है। TMC लीडरशिप को लेकर विवाद इतना बढ़ गया है कि बागी खेमा खुद दो फाड़ होने लगा है।

TMC में क्या चल रहा है? पूरी कहानी
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में BJP के हाथों करारी हार के बाद TMC दो खेमों में बंट चुकी है। एक तरफ ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी का खेमा, तो दूसरी तरफ पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 बागी विधायकों का गुट।
- बागियों ने हाल ही में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की मान्यता भी हासिल कर ली थी।
- लेकिन अब इसी गुट में ममता बनर्जी की भूमिका को लेकर तीखा विवाद छिड़ गया है।
मुख्य विवाद: ममता सिर्फ ‘सलाहकार’ बनें या सर्वोच्च नेता?
बागी विधायक दल के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने एक बैठक में प्रस्ताव रखा कि ममता बनर्जी को TMC विधायक दल की मुख्य सलाहकार बनाया जाए। इस प्रस्ताव पर कई बागी विधायकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
- पांचला विधानसभा क्षेत्र से बागी विधायक गुलशन मल्लिक ने साफ कहा: “हमें बताया गया था
- कि पार्टी ममता बनर्जी के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी। वह केवल एक सलाहकार नहीं हैं।
- हम चाहते हैं कि पार्टी उनके सक्रिय नेतृत्व में काम करे। अगर ममता बनर्जी को सर्वोच्च नेता
- के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता, तो हमें इस बागी गुट में रहने पर गंभीरता से सोचना होगा।”
- इसी सुर में सिताई से बागी विधायक संगीता रॉय बसुनिया ने भी कहा कि ममता बनर्जी
- हमारी सर्वोच्च नेता हैं और हमेशा रहेंगी। वे सिर्फ सलाहकार नहीं बन सकतीं।
बागियों की रणनीति: ममता से बैर नहीं, अभिषेक की खैर नहीं
बागी विधायकों ने शुरुआत से ही रणनीतिक रुख अपनाया है। वे बार-बार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि उनका विरोध अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव और पार्टी में उनके हस्तक्षेप के खिलाफ है, न कि ममता बनर्जी के खिलाफ।
यह रणनीति उन्हें कार्यकर्ताओं और जनता के बीच ममता के वफादार के रूप में पेश करने में मदद कर रही थी। लेकिन अब लीडरशिप वाले प्रस्ताव ने पूरे गुट में बेचैनी पैदा कर दी है।
ममता बनर्जी गुड न्यूज ममता बनर्जी के लिए क्यों फायदेमंद?
- बागियों में फूट: 58 सदस्यीय गुट में ही कलह शुरू हो गई है। इससे TMC की मुख्य धारा को मजबूती मिल सकती है।
- ममता की छवि मजबूत: बागी भी ममता को सर्वोच्च नेता मानने को तैयार हैं, जो उनकी लोकप्रियता को दिखाता है।
- अभिषेक पर दबाव: पूरा विवाद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व शैली को केंद्र में ला रहा है।
- राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि TMC में यह आंतरिक कलह लंबे समय तक चल सकती है।
- अगर बागी गुट टूटता है तो कई विधायक वापस ममता के खेमे में आ सकते हैं।
पश्चिम बंगाल राजनीति का भविष्य
- TMC की यह अस्थिरता BJP और अन्य विपक्षी दलों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
- ममता बनर्जी अगर इस संकट को संभाल लेती हैं तो उनकी पार्टी फिर से मजबूत हो सकती है।
- वहीं, अगर बगावत बढ़ी तो 2026 के बाद की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- 58 बागी विधायकों में आपसी मतभेद।
- ममता को सिर्फ सलाहकार बनाने का विरोध।
- ऋतब्रत बनर्जी vs अन्य बागी नेता।
- अभिषेक बनर्जी पर केंद्रित विवाद।
ममता बनर्जी के लिए यह सचमुच गुड न्यूज है। बागी गुट का आपसी टकराव उनकी स्थिति को मजबूत करता दिख रहा है। TMC में लीडरशिप का यह बवाल दर्शाता है कि पार्टी के संस्थापक के प्रति समर्थन अभी भी मजबूत है।
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