बैंक चोरी मामला जिस कर्मचारी पर बैंक में नोटों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही करोड़ों रुपये की चोरी कर फरार हो गया। 8.7 करोड़ रुपये की इस बड़ी चोरी ने बैंक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मई 2026 में गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में एक ऐसा घोटाला सामने आया है जो बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहा है। Bank of Baroda के कालूपुर ब्रांच में स्थित RBI Currency Chest का जॉइंट कस्टोडियन हर्षिद्ध कादियार (Harsiddh Kadiyar) पर 8.7 करोड़ रुपये चोरी करने का आरोप लगा है। जो व्यक्ति बैंक की नकदी की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहा था, वही चोर निकला।
यह मामला इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि Currency Chest RBI का मुद्रा भंडार होता है, जहां भारी सुरक्षा रहती है। फिर भी एक कर्मचारी ने महीनों तक चोरी की और रिकॉर्ड में हेराफेरी कर छुपाया।
बैंक चोरी मामला : घटना का पूरा विवरण
अहमदाबाद के कालूपुर स्थित BoB ब्रांच में RBI Currency Chest संचालित होता है। हर्षिद्ध कादियार 15 साल से बैंक में काम कर रहा था और जॉइंट कस्टोडियन के पद पर तैनात था। मुख्य कस्टोडियन संजय शर्मा के साथ मिलकर उसे नकदी की सुरक्षा और हिसाब-किताब का जिम्मा था।
जनवरी 2026 में उसने 174 रीम्स (Reams) के नोट्स निकाले, जिनमें हर रीम 500 रुपये के नोटों की 10 बंडल थी। कुल राशि 8.7 करोड़ रुपये बनती है। उसने स्टाफ के जाने के बाद नोट्स को बैगों में भरकर रात के समय बैंक से बाहर निकाला। जब सिक्योरिटी गार्ड ने पूछा तो उसने कहा – “ये स्क्रैप मटेरियल है, डिस्पोज करने जा रहा हूं।”
चोरी छुपाने के लिए उसने RBI के e-Kuber पोर्टल पर फर्जी बैलेंस सर्टिफिकेट अपलोड किए। इस तरह महीनों तक घाटा छिपा रहा। अप्रैल 2026 में वह स्वास्थ्य का बहाना बनाकर छुट्टी पर चला गया और वापस नहीं लौटा। नया कस्टोडियन जब चार्ज संभाला तो ऑडिट में कमी सामने आई। बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
आरोपी की गिरफ्तारी और बरामदगी
24 मई 2026 को अहमदाबाद पुलिस की जोन-3 LCB टीम ने हर्षिद्ध को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 2.2 करोड़ रुपये नकद और अन्य संपत्तियां बरामद हुईं। पूछताछ में उसने बताया कि चोरी का पैसा उसने:
- चंडखेड़ा और सोल क्षेत्र में 2 करोड़ से ज्यादा कीमत का घर खरीदने में लगाया।
- एक महिला कर्मचारी को नकद दिया।
- टेम्पो खरीदा।
- क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया।
पुलिस अब बाकी राशि की बरामदगी और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है।
बैंकिंग सुरक्षा में बड़ी लापरवाही
यह मामला कई सवाल खड़े करता है:
- सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी कैसे हुई?
- एक कर्मचारी अकेले इतनी बड़ी राशि कैसे निकाल सका?
- CCTV फुटेज पर नजर क्यों नहीं रखी गई?
- पहले 20 लाख रुपये की छोटी चोरी होने पर बैंक ने पुलिस में रिपोर्ट क्यों नहीं की?
पुलिस के अनुसार, कुछ महीने पहले हर्षिद्ध ने 20 लाख रुपये चुराए थे, बैंक ने रिकवर कर लिया और उसे नौकरी पर रखा रहा। इसी लापरवाही की वजह से बड़ा घोटाला हुआ।
आम जनता और बैंकिंग सिस्टम पर असर
हालांकि यह चोरी RBI Currency Chest से हुई है, जो मुख्य रूप से नोटों का भंडारण और वितरण के लिए होता है, लेकिन इससे आम ग्राहकों का पैसा सीधे प्रभावित नहीं होता। फिर भी बैंकिंग सिस्टम में विश्वास डगमगाता है।
- ग्राहक सोचते हैं – अगर सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला ही चोर है, तो हमारा पैसा कहां सुरक्षित है?
- छोटे-मोटे बैंक कर्मचारियों में नैतिकता और जवाबदेही पर सवाल उठते हैं।
- RBI और बैंकिंग रेगुलेटर्स को अपनी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।
ऐसे घोटालों से बचाव के उपाय
बैंकिंग क्षेत्र में विश्वासघात रोकने के लिए कुछ जरूरी कदम:
- डबल कस्टोडियन सिस्टम को सख्ती से लागू करना, जहां दो अधिकारी साथ में चेक करें।
- रियल-टाइम ऑडिट और AI आधारित निगरानी।
- e-Kuber पोर्टल पर दो स्तर की वेरिफिकेशन।
- कर्मचारियों की बैकग्राउंड चेकिंग और नियमित साइकोलॉजिकल असेसमेंट।
- छोटी चोरी पर भी तुरंत पुलिस एक्शन।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस मामले ने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया है। लोग लिख रहे हैं – “जो सुरक्षा दे, वही चोरी करे तो आम आदमी क्या करे?” विपक्षी दल सरकार और RBI पर सवाल उठा रहे हैं कि बैंकिंग सेक्टर में सुधार क्यों नहीं हो पा रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ने के बावजूद नकदी भंडारण में पुरानी व्यवस्था अभी भी कमजोर है।
निष्कर्ष
बैंक चोरी मामला: यह घटना सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि विश्वास के विश्वासघात की मिसाल है। बैंकिंग सिस्टम देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। अगर यहां सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले ही चोर निकलें, तो पूरे सिस्टम पर असर पड़ता है।
Bank of Baroda और RBI को इस मामले में पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। बाकी राशि की बरामदगी, अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी और दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
आम जनता के लिए सलाह: अपने बैंक खाते की नियमित जांच करें, अनावश्यक नकदी लेन-देन कम करें और डिजिटल ट्रांजेक्शन को प्राथमिकता दें।
यह मामला हमें याद दिलाता है कि सुरक्षा केवल दीवारों और कैमरों से नहीं, बल्कि ईमानदार इंसानों से बनती है। उम्मीद है कि इस घटना के बाद बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसे विश्वासघात न हो सकें।
नोट: यह जानकारी सार्वजनिक समाचार स्रोतों पर आधारित है। जांच अभी जारी है, इसलिए अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार करना चाहिए।






