टीएमसी सांसद सायोनी घोष उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भाजपा नेता और सिकंदराबाद नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. प्रदीप दीक्षित के एक विवादित बयान ने पूरे देश में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। टीएमसी सांसद सायोनी घोष के सिर कलम करने वाले को एक करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला गरमा गया। सायोनी घोष के सक्रिय होने के बाद भाजपा नेता अब खेद जताते हुए बैकफुट पर आ गए हैं।
कुछ दिन पहले बुलंदशहर के सिकंदराबाद में धर्म ध्वज यात्रा (3100 किलोमीटर लंबी) के शुभारंभ के दौरान डॉ. प्रदीप दीक्षित ने यह विवादित बयान दिया। वीडियो में उन्होंने सायोनी घोष के सिर के बदले एक करोड़ रुपये नकद इनाम देने की घोषणा की। यह बयान पंडित घनश्याम झा द्वारा निकाली जा रही यात्रा के संदर्भ में दिया गया था।

टीएमसी सांसद सायोनी घोष पूरा मामला क्या है?
जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, टीएमसी सांसद सायोनी घोष ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। सायोनी ने इसे महिला जनप्रतिनिधि को दी गई खुली धमकी बताया और पश्चिम बंगाल पुलिस व कोलकाता पुलिस से तुरंत कार्रवाई की अपील की।
सायोनी घोष का बयान
- सायोनी घोष ने कहा कि वे ऐसी धमकियों से डरने वाली नहीं हैं और लोकतंत्र में अपनी
- आवाज लगातार उठाती रहेंगी। उन्होंने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
भाजपा नेता प्रदीप दीक्षित का पलटाव
विवाद बढ़ने और सायोनी घोष के सक्रिय होने के बाद डॉ. प्रदीप दीक्षित ने बुधवार शाम एक वीडियो जारी कर अपने बयान पर खेद जताया। उन्होंने कहा:
- उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि सायोनी घोष पहले ही विवादित तस्वीर पर सार्वजनिक रूप से खेद जता चुकी हैं।
- वे किसी भी तरह की हिंसा के समर्थक नहीं हैं।
- किसी को हिंसा की बात करने या धार्मिक भावनाओं को आहत करने का अधिकार नहीं है।
इस खेद प्रकट करने के बावजूद विपक्षी दलों ने इसे भाजपा की असहिष्णुता और महिलाओं के खिलाफ मानसिकता का उदाहरण बताया है।
सायोनी घोष कौन हैं?
- सायोनी घोष पश्चिम बंगाल की टीएमसी सांसद हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव
- में वे काफी चर्चा में रहीं। वे साहसिक और मुखर छवि के लिए जानी जाती हैं।
- सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रियता रहती है।
प्रदीप दीक्षित कौन हैं?
डॉ. प्रदीप दीक्षित बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद नगर पालिका अध्यक्ष हैं। वे भाजपा के स्थानीय स्तर के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। इस घटना से उनकी छवि पर भी असर पड़ा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं!
- इस घटना ने उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है।
- विपक्षी पार्टियां इसे हेट स्पीच और महिला सुरक्षा से जोड़कर भाजपा पर हमला बोल रही हैं।
- वहीं भाजपा के कुछ नेता इसे व्यक्तिगत बयान बताकर मामले को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
- राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सोशल मीडिया के दौर में ऐसे बयान न सिर्फ व्यक्ति बल्कि पूरी
- पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। खासकर जब बात महिला सांसद की हो तो यह और भी संवेदनशील हो जाता है।
लोकतंत्र में हिंसा की भाषा स्वीकार्य नहीं
- भारतीय लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हिंसा या हिंसा भड़काने वाली भाषा किसी भी
- कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि नेताओं को अपने बयानों में संयम बरतना चाहिए।
- डॉ. प्रदीप दीक्षित द्वारा खेद जताए जाने के बावजूद पुलिस को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए
- ताकि भविष्य में कोई भी नेता ऐसी गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी न कर सके।
सायोनी घोष के सिर पर इनाम वाली घोषणा और उसके बाद प्रदीप दीक्षित का बैकफुट पर आना यूपी राजनीति की एक नई बहस बन गया है। यह मामला महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसक भाषा, राजनीतिक सहिष्णुता और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है।









