भारत का जवाब भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान की दुष्प्रचार नीति को बेनकाब कर दिया। जब पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने जम्मू-कश्मीर मुद्दा उठाया, तब भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तान के नरसंहार के इतिहास को पूरी दुनिया के सामने रख दिया। यह घटना वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत कूटनीति का प्रमाण है।
UNSC की एक बहस के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत पर आरोप लगाए। भारत ने इसे “भारत के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप” बताया। हरीश पर्वतनेनी ने स्पष्ट कहा कि जिस देश का अपना रिकॉर्ड नरसंहार और मानवाधिकार उल्लंघनों से भरा पड़ा है, उसे भारत पर लेक्चर देने का कोई अधिकार नहीं है।

भारत का जवाब पाकिस्तान का जम्मू-कश्मीर पर दखलंदाजी और भारत का मुंहतोड़ जवाब
#भारत ने पाकिस्तान को सीधा चेतावनी दी – “जो अपने ही लोगों पर बम बरसता है, वो हमें ज्ञान न दे!” यह बयान वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
पाकिस्तान के हालिया नरसंहार: अफगानिस्तान पर हमला
- भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के हालिया क्रूर कृत्यों का जिक्र किया। मार्च 2026 में पवित्र रमजान
- के महीने में पाकिस्तान ने काबुल के ओमिद नशामुक्ति उपचार अस्पताल पर बर्बर हवाई हमला किया।
- संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) के अनुसार, इस हमले में 269 मासूम नागरिक मारे गए
- और 122 घायल हुए। हमला तब हुआ जब लोग नमाज पढ़कर मस्जिद से बाहर निकल रहे थे।
पर्वतनेनी ने कहा, “पाकिस्तान अंधेरे में मासूमों को निशाना बनाता है और अंतरराष्ट्रीय कानून का पाखंड करता है।” इस हमले के कारण 94,000 से अधिक अफगान नागरिक विस्थापित हो चुके हैं।
1971 का काला अध्याय: ऑपरेशन सर्चलाइट
- भारत ने पाकिस्तान की सेना द्वारा 1971 में बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) में किए गए
- अत्याचारों को भी याद दिलाया। ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान पाकिस्तानी सेना ने लाखों महिलाओं
- के साथ बलात्कार किया और लाखों निर्दोषों का कत्लेआम किया। भारतीय राजदूत ने कहा
- कि जो देश अपने ही नागरिकों पर इतना जुल्म ढा चुका है, उसके मुंह से मानवाधिकार की बात शोभा नहीं देती।
पाकिस्तान की रणनीति: आतंक और प्रोपेगैंडा
भारत ने UNSC में यह भी उजागर किया कि पाकिस्तान पिछले कई दशकों से अपनी आंतरिक असफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए आतंकवाद और हिंसा का सहारा लेता आया है। हरीश पर्वतनेनी ने अंत में कहा:
“जिस देश के पास न विश्वास है, न कानून है और न नैतिकता, उसकी खोखली बयानबाजी और प्रोपेगैंडा को अब पूरी दुनिया समझ चुकी है।”
भारत की मजबूत कूटनीति और वैश्विक छवि
- यह घटना भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाती है।
- भारत अब UNSC जैसे मंचों पर आक्रामक लेकिन तथ्य-आधारित तरीके से अपना पक्ष रख रहा है।
- पाकिस्तान की नापाक कोशिशें हर बार उल्टी पड़ रही हैं।
- जम्मू-कश्मीर आज भारत का अभिन्न अंग है।
- अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद यहां विकास की नई लहर आई है।
- पाकिस्तान का बार-बार यह मुद्दा उठाना उसकी हताशा को दिखाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
- मानवाधिकारों पर दोहरा मापदंड उजागर हुआ।
- पाकिस्तान के आतंक प्रायोजक चरित्र को दुनिया के सामने रखा गया।
- भारत की “Zero Tolerance on Terrorism” नीति को मजबूती मिली।
- UNSC में भारत की विश्वसनीयता बढ़ी।
भारत ने UNSC में पाकिस्तान को आईना दिखा दिया। जो देश अपने ही लोगों पर अत्याचार करता है और आतंकवाद को बढ़ावा देता है, उसे किसी और देश के आंतरिक मामलों पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। हरीश पर्वतनेनी का यह करारा जवाब भारतीय कूटनीति की नई मिसाल बन गया है।








