कॉपर प्राइस आज : 27 दिसंबर 2025 को कॉपर (तांबा) के बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। चीन के शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज (SHFE) पर कॉपर ने नया रिकॉर्ड हाई बनाया, जबकि न्यूयॉर्क के कॉमेक्स पर भी कीमतें 5.6% तक चढ़ गईं। वैश्विक स्तर पर सप्लाई की तंगी, कमजोर अमेरिकी डॉलर और एनर्जी ट्रांजिशन की बढ़ती मांग ने कॉपर को 2025 का सबसे मजबूत परफॉर्मर बना दिया है। आइए जानते हैं पूरी डिटेल्स, कारण और भविष्य के ट्रेंड्स।
कॉपर प्राइस आज के भाव : रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा!
- शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज (SHFE): कॉपर की कीमत लगभग 1,00,000 युआन प्रति टन (करीब $14,270) पहुंच गई – यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर।
- कॉमेक्स (न्यूयॉर्क): कॉपर $5.8395 प्रति पाउंड पर सेटल हुआ, इंट्राडे में $5.8075 तक पहुंचा (जुलाई के बाद सबसे ऊंचा)।
- 2025 में कुल बढ़ोतरी: न्यूयॉर्क में कॉपर करीब 42% ऊपर चला गया।

ये तेजी क्रिसमस ब्रेक के बाद LME (लंदन मेटल एक्सचेंज) के दोबारा खुलने से पहले ही देखी गई। भारत में MCX पर भी कॉपर फ्यूचर्स ₹1,200-₹1,220 प्रति किलो के आसपास ट्रेड कर रहे हैं।
कॉपर कीमतों में तेजी के मुख्य कारण
चीन की फिस्कल स्टिमुलस उम्मीद चीन ने 2026 के लिए ज्यादा आक्रामक फिस्कल पॉलिसी और ढीली मॉनेटरी पॉलिसी का संकेत दिया है। दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर कंज्यूमर होने के नाते चीन की इकोनॉमी में सुधार की उम्मीद से इंडस्ट्रियल मेटल्स में तेजी आई। इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और प्रॉपर्टी सेक्टर में बढ़ोतरी कॉपर की डिमांड बढ़ाएगी।
ग्लोबल सप्लाई की तंगी और 2026 की चिंता प्रमुख खदानों (ग्रासबर्ग, कामोआ-काकुला, एल टेनिएंटे) में डिसरप्शन, धीमी नई माइंस और परमिटिंग की देरी से 2026 में सप्लाई टाइट होने की आशंका है। अमेरिका में स्टॉक बढ़ने से दूसरे देशों में खरीदारों को चिंता है।
कमजोर अमेरिकी डॉलर डॉलर इंडेक्स इस हफ्ते जून के बाद सबसे ज्यादा गिरावट पर है। कमजोर डॉलर से कमोडिटी की कीमतें सपोर्ट मिलती हैं।
एनर्जी ट्रांजिशन और लॉन्ग-टर्म डिमांड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), रिन्यूएबल एनर्जी, पावर ग्रिड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से कॉपर की स्ट्रक्चरल डिमांड बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2035 तक क्लीन एनर्जी से कॉपर की खपत तीन गुना हो सकती है।
बाजार की प्रतिक्रिया और अन्य मेटल्स
- कॉपर की तेजी के साथ सोना, चांदी और प्लेटिनम भी रिकॉर्ड हाई पर पहुंचे।
- दिसंबर में मेटल्स में भारी तेजी आई, जो ट्रेड डिस्लोकेशन, जियोपॉलिटिकल टेंशन और सप्लाई
- शॉक्स से जुड़ी है। 2026 में अमेरिकी टैरिफ की संभावना से US में कॉपर स्टॉकिंग बढ़ रही है
- जो ग्लोबल ट्रेड को प्रभावित कर सकती है।
हिंदुस्तान कॉपर जैसे स्टॉक्स पर असर
- भारत में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के शेयर 26-27 दिसंबर को 7-8% तक उछले और 15 साल के हाई पर पहुंचे।
- ग्लोबल कॉपर रैली का सीधा फायदा सरकारी कंपनी को मिल रहा है। निवेशक इसे लॉन्ग-टर्म बेट मान रहे हैं।
भविष्य का आउटलुक: 2026 में क्या होगा?
- बुलिश व्यू: सप्लाई डेफिसिट और एनर्जी ट्रांजिशन से कॉपर $12,000-$15,000 प्रति टन तक जा सकता है।
- कॉशियस व्यू: गोल्डमैन सैक्स जैसे एक्सपर्ट्स 2026 में कुछ गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं
- क्योंकि ग्लोबल सरप्लस रह सकता है।
- रिस्क: अमेरिकी टैरिफ, चीन की डिमांड में सुस्ती या नई माइंस से सप्लाई बढ़ना।
कॉपर 2025 का स्टार कमोडिटी
- कॉपर ने 2025 में शानदार प्रदर्शन किया और 27 दिसंबर को चीन में रिकॉर्ड बनाकर निवेशकों का ध्यान खींचा।
- अगर आप कमोडिटी मार्केट या मेटल स्टॉक्स में निवेश सोच रहे हैं तो कॉपर पर नजर रखें।
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