पाला का कहर मुन्नार और नीलगिरि की चाय बागानों में भारी नुकसान उत्पादन पर 3 महीने का असर!

On: December 23, 2025 3:44 PM
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पाला का कहर

पाला का कहर : दिसंबर 2025 में दक्षिण भारत के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों मुन्नार (केरल) और नीलगिरि (तमिलनाडु) में तापमान गिरने से पाला (फ्रॉस्ट) ने चाय की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। मुन्नार में अकेले 100 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिससे अगले तीन महीनों तक उत्पादन प्रभावित रहने की आशंका है। UPASI टी रिसर्च फाउंडेशन के डेटा के अनुसार, चेंदुवराई, साइलेंट वैली, लेटचमी, देवीकुलम और नल्लाथन्नी में तापमान जीरो डिग्री तक पहुंच गया। यह जलवायु परिवर्तन का एक और प्रभाव है, जो दक्षिण भारत की चाय इंडस्ट्री को चुनौती दे रहा है। इस ब्लॉग में हम पाले के नुकसान, कारणों और चाय उत्पादकों पर असर पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

केरल के मुन्नार क्षेत्र में पाला ने चाय बागानों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हैरिसन्स मलयालम लिमिटेड के टी ऑपरेशंस वाइस प्रेसिडेंट अनिल जॉर्ज ने बताया कि लॉकहार्ट एस्टेट और अन्य बागानों में गंभीर पाला दर्ज किया गया। एक चाय उत्पादन कंपनी के सूत्रों के अनुसार, मुन्नार में 100 हेक्टेयर फसल नष्ट हुई है, जो तीन महीनों के उत्पादन को प्रभावित करेगी। कटाबैटिक फ्लो (रात में ठंडी हवा का घाटियों की ओर बहना) के कारण निचले इलाकों में पाला ज्यादा पड़ा।

पाला का कहर
पाला का कहर

तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में ऊधगमंडलम (ऊटी), कोटागिरी और अन्य आंतरिक क्षेत्रों में पाला की स्थिति बनी हुई है। नीलगिरि बॉट लीफ टी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष धनंजयन कृष्णमूर्ति ने बताया कि ज्यादातर बागान छोटे किसानों के हैं और तापमान गिरने से उनकी कमाई प्रभावित हो रही है। उत्पादन नुकसान का आकलन दो सप्ताह बाद ही संभव होगा। छोटे चाय उत्पादक सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि उनके पास बड़े प्लांटेशन कंपनियों जैसी रिकवरी क्षमता नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पाला जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। दक्षिण भारत के चाय क्षेत्रों में पहले दिसंबर-जनवरी में पाला पड़ता था, लेकिन अब इसका पैटर्न बदल रहा है। तापमान में अचानक गिरावट चाय की कोमल पत्तियों और कलियों को जला देती है जिससे फसल नष्ट हो जाती है। UPASI जैसे संस्थान लंबे समय से चेतावनी दे रहे हैं कि क्लाइमेट चेंज चाय उत्पादन को स्थायी खतरा बन रहा है।

  • मुन्नार और नीलगिरि दक्षिण भारत की चाय उत्पादन की रीढ़ हैं। मुन्नार केरल का आधा चाय उत्पादन करता है।
  • इस नुकसान से न केवल उत्पादन कम होगा, बल्कि चाय की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
  • छोटे किसानों की आय प्रभावित होगी, जबकि बड़े प्लांटेशन कंपनियां रिकवरी के लिए संघर्ष करेंगी।
  • पिछले वर्षों में भी ऐसे पाले से लाखों किलो फसल नष्ट हुई थी।

चाय उत्पादकों को पाले से बचाव के लिए नए तरीके अपनाने होंगे – जैसे, फ्रॉस्ट-रेजिस्टेंट वैरायटी, स्प्रिंकलर सिस्टम या कवरिंग। सरकार और UPASI जैसे संस्थानों से सहायता की जरूरत है। जलवायु अनुकूल खेती पर जोर देना होगा।

  • 2025 के दिसंबर में मुन्नार और नीलगिरि में पाले ने चाय उत्पादन को बड़ा झटका दिया है।
  • तीन महीनों तक असर रहने की आशंका से इंडस्ट्री चिंतित है।
  • यह जलवायु परिवर्तन की याद दिलाता है कि कृषि क्षेत्र को नए चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।
  • चाय प्रेमी अब महंगी चाय के लिए तैयार रहें!

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